A Poem Looking Into The Language of Tears

आँसू......
आँखॊं सॆ छलकता ये पानी,
कभी दर्द की कहानी कहता है.........
कभी खुशियॊं को ज़ुबा देता है।
आँसू......
अहसासॊं का यह मासूम दर्पण,
कहता है वह .........
जो मन छुपा रह होता है।
आँसू......
उर के पटल का यह निविॆकार प्रतिबिंब,
दबे ज़ज्बातों के चित्र उकेरता है।
शब्दों की भाषा जहाँ असहाय होती है,
आँखॊं सॆ बहकर यह पानी.........
ध्वनिहीन कहानी कहता है।
बहता है यह पानी..........
जब भावनाऍ असंयमित होती हैं।
दर्द हो या खुशी .........
दोनों का अतिरेक आँसूऒं मॆं परिणित होता है।
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Akanksha Ranjan
1 comment:
Hey, you are very good! :) What college in Delhi do you go to?
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