नारी तू कौन है?
तू ममता की मूरत है,
तू त्याग की सूरत है,
तू प्रेम का सागर है,
तू बलिदान का समंदर है;
ये तो तेरे प्रचलित स्वरुप हैं,
समाज के निर्मित तेरे रूप हैं।
इनसे इतर क्यों तेरा अस्तित्व गौण है?
नारी तू कौन है?
तुझे भी चाहिए किसी की ममता,
क्यों हर बार परखी जाए
तेरे ही त्याग की क्षमता?
क्यों बलिदान करने में ही
तेरा सम्मान है?
जब नहीं रखा जाता
तेरी भावनाओं का मान है?
इन सारे सवालो पर
नारी तू क्यों मौन है?
नारी तू कौन है?
क्यों तू नहीं समझती
तेरा भी स्वतंत्र अस्तित्व है;
तेरी भावनाओं की कद्र करना
इस समाज का दायित्व है।
तू अपने ऊपर होने वाले
अत्याचारों को रोक सकती है;
तू भी अपने बारे में
सोच सकती है।
नारी तूने धारण किया जो मौन है,
वही बनाता तेरा अस्तित्व गौण है।
नारी तुझे समझना होगा
आखिर तू कौन है?
नारी तू कौन है?
----------
आकांक्षा रंजन
तू ममता की मूरत है,
तू त्याग की सूरत है,
तू प्रेम का सागर है,
तू बलिदान का समंदर है;
ये तो तेरे प्रचलित स्वरुप हैं,
समाज के निर्मित तेरे रूप हैं।
इनसे इतर क्यों तेरा अस्तित्व गौण है?
नारी तू कौन है?
तुझे भी चाहिए किसी की ममता,
क्यों हर बार परखी जाए
तेरे ही त्याग की क्षमता?
क्यों बलिदान करने में ही
तेरा सम्मान है?
जब नहीं रखा जाता
तेरी भावनाओं का मान है?
इन सारे सवालो पर
नारी तू क्यों मौन है?
नारी तू कौन है?
क्यों तू नहीं समझती
तेरा भी स्वतंत्र अस्तित्व है;
तेरी भावनाओं की कद्र करना
इस समाज का दायित्व है।
तू अपने ऊपर होने वाले
अत्याचारों को रोक सकती है;
तू भी अपने बारे में
सोच सकती है।
नारी तूने धारण किया जो मौन है,
वही बनाता तेरा अस्तित्व गौण है।
नारी तुझे समझना होगा
आखिर तू कौन है?
नारी तू कौन है?
----------
आकांक्षा रंजन
No comments:
Post a Comment